Thursday, December 6, 2018

इंस्पेक्टर सुबोध का 25 लाख का बैंक कर्ज भी सरकार चुकाएगी, परिजन से योगी के 7 वादे

बुलंदशहर हिंसा में शहीद हुए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के परिजन गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से यहां उनके बंगले पर मिले। मुख्यमंत्री ने उनसे कुछ और वादे किए। सरकार की ओर से इस परिवार से सात वादे किए जा चुके हैं।

योगी ने कहा- दोषी बच नहीं सकते

मुख्यमंत्री ने सुबोध के परिवार से कहा- दोषी इस गलतफहमी में न रहें कि वे बच जाएंगे। बुलंदशहर में कई टीमें जांच कर रही हैं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। योगी से मुलाकात करने सुबोध की पत्नी रजनी दोनों बेटों और बहन के साथ पहुंची थीं। उनके साथ जिले के प्रभारी मंत्री अतुल गर्ग, डीजीपी ओपी सिंह और एटा विधायक सतपाल मौजूद रहे।

घटना वाले दिन आया था विधायक का फोन
पत्नी रजनी ने मुख्यमंत्री से कहा- घटना से तीन दिन पहले शहीद सुबोध ने गोकशी के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। घटना वाले दिन इस संबंध में एक विधायक का फोन आया था।

गोकशी के शक में भड़की थी हिंसा
बुलंदशहर के स्याना में सोमवार को गोकशी को लेकर हिंसा फैली थी। आरोप है कि इसकी अगुआई बजरंग दल के नेता योगेश राज ने की थी। हिंसा में गोली लगने से इंस्पेक्टर सुबोध की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की हैं। पहली एफआईआर योगेश की शिकायत पर गोकशी मामले में दर्ज की गई है। इसमें सात लोगों के नाम हैं। वहीं, दूसरी एफआईआर हिंसा और इंस्पेक्टर की हत्या के मामले में दर्ज किया गया। इसमें 27 के नाम हैं, 60 से ज्यादा अज्ञात हैं। इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि चार को हिरासत में लिया गया है।

पिता की मौत के बाद मिली थी नौकरी
बुलन्दशहर के स्याना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सुबोध को उनके पिता एसआई राम प्रताप राठौर की 1994 में मौत के एक साल बाद पुलिस विभाग में नौकरी मिली थी। मृतक इंस्पेक्टर दो भाइयों में छोटे थे। उनका बड़ा भाई अतुल कुमार राठौर सेना से सेवानिवृत्त हैं, जो दिल्ली में निजी व्यापार करते हैं। शहीद सुबोध के भी दो बेटे हैं। इनमें श्रेय (21) और अभिषेक(19) वर्ष हैं। पति के शहीद होने के बाद पत्नी रजनी का रो-रोकर बुरा हाल है।

परिवार से फोर्स का रहा है लम्बा रिश्ता : भाई अतुल ने बताया कि हमारे परिवार का पुलिस फोर्स से लंबा रिश्ता है। पिता के साथ चाचा रामओतार भी पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हुए हैं। मैं खुद सेना से रिटायर्ड हूं। इस तरह से शहीद इंस्पेक्टर का फोर्स के साथ पुराना रिश्ता बताया जाता है।

नौ महीने वृंदावन में रहे: अतुल ने बताया कि इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह वृदांवन में भी तैनाती के दौरान चर्चा में रहे। सुबोध कुमार सिंह ने वृदांवन कोतवाली प्रभारी रहते हुए गोतस्करों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। यहां वाहन चोरों से मुठभेड़ में लगने से वह घायल हो गए थे। उन्होंने 27 जुलाई 2017 से 1 अगस्त 2018 तक 9 महीने तक अपनी सेवाएं वृदांवन में दी और इसके बाद बुलंदशहर स्थानांतरण कर दिए गए थे।

No comments:

Post a Comment