बुलंदशहर हिंसा में शहीद हुए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के परिजन गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से यहां उनके बंगले पर मिले। मुख्यमंत्री ने उनसे कुछ और वादे किए। सरकार की ओर से इस परिवार से सात वादे किए जा चुके हैं।
योगी ने कहा- दोषी बच नहीं सकते
मुख्यमंत्री ने सुबोध के परिवार से कहा- दोषी इस गलतफहमी में न रहें कि वे बच जाएंगे। बुलंदशहर में कई टीमें जांच कर रही हैं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। योगी से मुलाकात करने सुबोध की पत्नी रजनी दोनों बेटों और बहन के साथ पहुंची थीं। उनके साथ जिले के प्रभारी मंत्री अतुल गर्ग, डीजीपी ओपी सिंह और एटा विधायक सतपाल मौजूद रहे।
घटना वाले दिन आया था विधायक का फोन
पत्नी रजनी ने मुख्यमंत्री से कहा- घटना से तीन दिन पहले शहीद सुबोध ने गोकशी के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। घटना वाले दिन इस संबंध में एक विधायक का फोन आया था।
गोकशी के शक में भड़की थी हिंसा
बुलंदशहर के स्याना में सोमवार को गोकशी को लेकर हिंसा फैली थी। आरोप है कि इसकी अगुआई बजरंग दल के नेता योगेश राज ने की थी। हिंसा में गोली लगने से इंस्पेक्टर सुबोध की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की हैं। पहली एफआईआर योगेश की शिकायत पर गोकशी मामले में दर्ज की गई है। इसमें सात लोगों के नाम हैं। वहीं, दूसरी एफआईआर हिंसा और इंस्पेक्टर की हत्या के मामले में दर्ज किया गया। इसमें 27 के नाम हैं, 60 से ज्यादा अज्ञात हैं। इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि चार को हिरासत में लिया गया है।
पिता की मौत के बाद मिली थी नौकरी
बुलन्दशहर के स्याना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सुबोध को उनके पिता एसआई राम प्रताप राठौर की 1994 में मौत के एक साल बाद पुलिस विभाग में नौकरी मिली थी। मृतक इंस्पेक्टर दो भाइयों में छोटे थे। उनका बड़ा भाई अतुल कुमार राठौर सेना से सेवानिवृत्त हैं, जो दिल्ली में निजी व्यापार करते हैं। शहीद सुबोध के भी दो बेटे हैं। इनमें श्रेय (21) और अभिषेक(19) वर्ष हैं। पति के शहीद होने के बाद पत्नी रजनी का रो-रोकर बुरा हाल है।
परिवार से फोर्स का रहा है लम्बा रिश्ता : भाई अतुल ने बताया कि हमारे परिवार का पुलिस फोर्स से लंबा रिश्ता है। पिता के साथ चाचा रामओतार भी पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हुए हैं। मैं खुद सेना से रिटायर्ड हूं। इस तरह से शहीद इंस्पेक्टर का फोर्स के साथ पुराना रिश्ता बताया जाता है।
नौ महीने वृंदावन में रहे: अतुल ने बताया कि इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह वृदांवन में भी तैनाती के दौरान चर्चा में रहे। सुबोध कुमार सिंह ने वृदांवन कोतवाली प्रभारी रहते हुए गोतस्करों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। यहां वाहन चोरों से मुठभेड़ में लगने से वह घायल हो गए थे। उन्होंने 27 जुलाई 2017 से 1 अगस्त 2018 तक 9 महीने तक अपनी सेवाएं वृदांवन में दी और इसके बाद बुलंदशहर स्थानांतरण कर दिए गए थे।
समझा था प्रैंक
Thursday, December 6, 2018
Thursday, November 29, 2018
दिल्ली में जुटे देशभर से किसान, रामलीला मैदान की ओर कर रहे हैं मार्च
देश भर के किसान एक बार फिर राजधानी दिल्ली कूच कर रहे हैं. पूरे देश में पदयात्रा के बाद बड़ी संख्या में किसान 29 और 30 नवंबर को दिल्ली आने वाले आठ प्रमुख रास्तों से दाखिल होने वाले हैं, जिसे लेकर दिल्ली पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है. इस वक्त ये किसान दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर बिजवासन इलाके में ठहरे हुए हैं. सुबह 9:00 बजे यहां से निकलेंगे और तकरीबन 25 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए रामलीला मैदान पहुंचेंगे. योगेंद्र यादव इस मार्च की अगुवाई कर रहे हैं.
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति के बैनर तले यह किसान इकट्ठा हुए हैं. पूर्ण ऋण माफी और फसलों की लागत का डेढ़ गुना मुआवजे की मांग और एमएस स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट को पूरी तरह से लागू करने की मांग को लेकर किसान जुटे हैं.
हालांकि पिछले आंदोलन से ये आंदोलन काफी हद तक अलग है. एक तरफ किसानों की संख्या कम नजर रही है तो वहीं दूसरी ओर ये किसान बेहद व्यवस्थित हैं. पिछली बार सड़कों पर जमे किसान इस बार सामुदायिक भवन में ठहरे हुए हैं. इस बार इनका नेतृत्व योगेंद्र यादव कर रहे हैं.
दिल्ली पुलिस ने किसानों के कूच को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें साफ कहा है कि जंतर-मंतर पर एक हजार से ज्यादा लोगों का जमा होना प्रतिबंधित है. ऐसे में अगर किसानों की संख्या इससे ज्यादा जाती है तो उन्हें रामलीला मैदान में धरना-प्रदर्शन करना होगा.
(कहां-कहां से दिल्ली आ रहे हैं किसान, गूगल मैप में देखने के लिए यहां क्लिक करें)
करीब 200 किसान संगठनों की रैली
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर देशभर के दो सौ से ज्यादा किसान-मजदूर संगठन दो दिनों तक देश की राजधानी दिल्ली में जुट रहे हैं. प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक, 'किसान मुक्ति यात्रा' नाम से किए जा रहे इस विशाल प्रदर्शन में किसान दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटेंगे और फिर वहां से संसद के लिए मार्च करेंगे.
किसानों की तादाद को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने एहतियातन एडवाइजरी जारी करते हुए बड़ी संख्या में जंतर मंतर पर न जुटने के निर्देश दिए हैं.
किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाने और कृषि उत्पाद लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य मुहैया कराने की मांग को लेकर लगभग 200 किसान संगठनों के आह्वान पर गुरुवार से आयोजित आंदोलन के लिये किसानों का दिल्ली का पहुंचना शुरू हो गया है.
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा बुलाए गए संसद मार्च को वाम दलों सहित 21 राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल है. मेघालय, जम्मू कश्मीर, गुजरात और केरल सहित देश के विभिन्न राज्यों से किसानों के समूह सड़क और रेल मार्ग से दिल्ली और आसपास के इलाकों में इकट्ठा होने लगे हैं. समिति के संयोजक हन्नान मोल्लाह ने इसे अब तक का सबसे बड़ा किसान आंदोलन होने का दावा करते हुए कहा कि गुरुवार को रामलीला मैदान में किसान सभा के आयोजन के बाद शुक्रवार को किसानों का हुजूम रामलीला मैदान से संसद मार्च करेगा.
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति के बैनर तले यह किसान इकट्ठा हुए हैं. पूर्ण ऋण माफी और फसलों की लागत का डेढ़ गुना मुआवजे की मांग और एमएस स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट को पूरी तरह से लागू करने की मांग को लेकर किसान जुटे हैं.
हालांकि पिछले आंदोलन से ये आंदोलन काफी हद तक अलग है. एक तरफ किसानों की संख्या कम नजर रही है तो वहीं दूसरी ओर ये किसान बेहद व्यवस्थित हैं. पिछली बार सड़कों पर जमे किसान इस बार सामुदायिक भवन में ठहरे हुए हैं. इस बार इनका नेतृत्व योगेंद्र यादव कर रहे हैं.
दिल्ली पुलिस ने किसानों के कूच को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें साफ कहा है कि जंतर-मंतर पर एक हजार से ज्यादा लोगों का जमा होना प्रतिबंधित है. ऐसे में अगर किसानों की संख्या इससे ज्यादा जाती है तो उन्हें रामलीला मैदान में धरना-प्रदर्शन करना होगा.
(कहां-कहां से दिल्ली आ रहे हैं किसान, गूगल मैप में देखने के लिए यहां क्लिक करें)
करीब 200 किसान संगठनों की रैली
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर देशभर के दो सौ से ज्यादा किसान-मजदूर संगठन दो दिनों तक देश की राजधानी दिल्ली में जुट रहे हैं. प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक, 'किसान मुक्ति यात्रा' नाम से किए जा रहे इस विशाल प्रदर्शन में किसान दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटेंगे और फिर वहां से संसद के लिए मार्च करेंगे.
किसानों की तादाद को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने एहतियातन एडवाइजरी जारी करते हुए बड़ी संख्या में जंतर मंतर पर न जुटने के निर्देश दिए हैं.
किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाने और कृषि उत्पाद लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य मुहैया कराने की मांग को लेकर लगभग 200 किसान संगठनों के आह्वान पर गुरुवार से आयोजित आंदोलन के लिये किसानों का दिल्ली का पहुंचना शुरू हो गया है.
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा बुलाए गए संसद मार्च को वाम दलों सहित 21 राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल है. मेघालय, जम्मू कश्मीर, गुजरात और केरल सहित देश के विभिन्न राज्यों से किसानों के समूह सड़क और रेल मार्ग से दिल्ली और आसपास के इलाकों में इकट्ठा होने लगे हैं. समिति के संयोजक हन्नान मोल्लाह ने इसे अब तक का सबसे बड़ा किसान आंदोलन होने का दावा करते हुए कहा कि गुरुवार को रामलीला मैदान में किसान सभा के आयोजन के बाद शुक्रवार को किसानों का हुजूम रामलीला मैदान से संसद मार्च करेगा.
Wednesday, November 7, 2018
रात का पारा 2.60 और दिन का 2.20 लुढ़का
दीपावली से एक दिन पहले शहर में मौसम के तेवर बदल गए। रात का तापमान 2.6 डिग्री और दिन का तापमान 2.2 डिग्री लुढ़क गया। दिन में पारा 30 डिग्री से नीचे पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दीपावली की रात भी ठंडक ऐसी ही रहने का अनुमान है।
हवा का रुख बदलने से रात का तापमान 15.4 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य से 1 डिग्री कम रहा। रात 10 बजे के बाद ठंडक बढ़ गई थी। एक दिन पहले रात का तापमान 18.0 डिग्री दर्ज किया गया था। दिन का तापमान 29.9 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य रहा। दिन में तीखी धूप नहीं थी। शाम होने के बाद ठंडी हवा चलने लगी थी। रात 8.30 बजे के बाद ठंड असर दिखाने लगी थी। सोमवार को दिन का तापमान 32.1 डिग्री दर्ज किया गया था। सोमवार की रात इस नवंबर की सबसे सर्द रात रही। मंगलवार इस नवंबर का सबसे ठंडा दिन रहा।
तापमान में गिरावट: 48 घंटे पहले शहर में दिन और रात का तापमान सामान्य से 2- 3 डिग्री तक ज्यादा बना हुआ था। बीते 48 घंटे में दिन के तापमान में 3.9 डिग्री की गिरावट हुई। दो दिन पहले दिन का तापमान 33.8 डिग्री तक पहुंच गया था। ऐसा ही असर रात के तापमान पर भी पड़ा। यह भी दो दिन पहले 18.6 डिग्री दर्ज किया गया था। इसमें भी 3.2 डिग्री की कमी आई।
रात 9 बजे से पहले ही तीन घंटे में 6.6 डिग्री लुढ़क गया था पारा : सोमवार शाम ढलने के बाद हवा का रुख बदला था। इसी वजह से रात नौ बजे के पहले ही तापमान 6.6 डिग्री नीचे आ गया था। शाम 5.30 बजे पारा 29 डिग्री पर था। तीन घंटे बाद रात 8.30 बजे यह लुढ़ककर 22.4 डिग्री पर आ गया था।
यह है खास वजह : वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एसके डे ने बताया कि कश्मीर समेत उत्तर भारत पहुंचा वेस्टर्न डिस्टरबेंस वहां से पास हो गया है। कश्मीर घाटी और हिमाचल कीवादियों में हुई बर्फबारी के बाद हमारे यहां हवा का रुख बदलकर उत्तरी हो गया। उत्तर भारत से सर्द हवा आ रही है। इस वजह से दिन और रात के तापमान में गिरावट हुई। दो- तीन दिन मौसम ऐसा ही रहने की संभावना है। फिर तापमान में इजाफा हो सकता है।
आजादी के 6 साल पहले 1941 में सबसे सर्द था नवंबर : शहर में नवंबर आजादी के 6 साल पहले 1941 में ही अभी तक सबसे सर्द रहा है। 30 नवंबर 1941 काे रात का तापमान 6.1 डिग्री दर्ज किया गया था। यह नवंबर में रात के सबसे कम तापमान का आॅल टाइम रिकाॅर्ड भी है।
2010 और 2015 में नवंबर में नहीं पड़ी थी ठंड : 2010 और 2015 में नवंबर में बिलकुल भी ठंड नहीं पड़ी थी। हालात यह थे कि रात का तापमान 14 डिग्री से भी ज्यादा रहा था। इन दो सालों में रात का औसत तापमान भी 17 और 18 डिग्री से ज्यादा रहा था। इन 12 सालों में नवंबर में रात का औसत तापमान भी 13 डिग्री से कम नहीं रहा। वेसे राजधानी में अभी तक 1977 में नवंबर सबसे गर्म रहा था।
हवा का रुख बदलने से रात का तापमान 15.4 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य से 1 डिग्री कम रहा। रात 10 बजे के बाद ठंडक बढ़ गई थी। एक दिन पहले रात का तापमान 18.0 डिग्री दर्ज किया गया था। दिन का तापमान 29.9 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य रहा। दिन में तीखी धूप नहीं थी। शाम होने के बाद ठंडी हवा चलने लगी थी। रात 8.30 बजे के बाद ठंड असर दिखाने लगी थी। सोमवार को दिन का तापमान 32.1 डिग्री दर्ज किया गया था। सोमवार की रात इस नवंबर की सबसे सर्द रात रही। मंगलवार इस नवंबर का सबसे ठंडा दिन रहा।
तापमान में गिरावट: 48 घंटे पहले शहर में दिन और रात का तापमान सामान्य से 2- 3 डिग्री तक ज्यादा बना हुआ था। बीते 48 घंटे में दिन के तापमान में 3.9 डिग्री की गिरावट हुई। दो दिन पहले दिन का तापमान 33.8 डिग्री तक पहुंच गया था। ऐसा ही असर रात के तापमान पर भी पड़ा। यह भी दो दिन पहले 18.6 डिग्री दर्ज किया गया था। इसमें भी 3.2 डिग्री की कमी आई।
रात 9 बजे से पहले ही तीन घंटे में 6.6 डिग्री लुढ़क गया था पारा : सोमवार शाम ढलने के बाद हवा का रुख बदला था। इसी वजह से रात नौ बजे के पहले ही तापमान 6.6 डिग्री नीचे आ गया था। शाम 5.30 बजे पारा 29 डिग्री पर था। तीन घंटे बाद रात 8.30 बजे यह लुढ़ककर 22.4 डिग्री पर आ गया था।
यह है खास वजह : वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एसके डे ने बताया कि कश्मीर समेत उत्तर भारत पहुंचा वेस्टर्न डिस्टरबेंस वहां से पास हो गया है। कश्मीर घाटी और हिमाचल कीवादियों में हुई बर्फबारी के बाद हमारे यहां हवा का रुख बदलकर उत्तरी हो गया। उत्तर भारत से सर्द हवा आ रही है। इस वजह से दिन और रात के तापमान में गिरावट हुई। दो- तीन दिन मौसम ऐसा ही रहने की संभावना है। फिर तापमान में इजाफा हो सकता है।
आजादी के 6 साल पहले 1941 में सबसे सर्द था नवंबर : शहर में नवंबर आजादी के 6 साल पहले 1941 में ही अभी तक सबसे सर्द रहा है। 30 नवंबर 1941 काे रात का तापमान 6.1 डिग्री दर्ज किया गया था। यह नवंबर में रात के सबसे कम तापमान का आॅल टाइम रिकाॅर्ड भी है।
2010 और 2015 में नवंबर में नहीं पड़ी थी ठंड : 2010 और 2015 में नवंबर में बिलकुल भी ठंड नहीं पड़ी थी। हालात यह थे कि रात का तापमान 14 डिग्री से भी ज्यादा रहा था। इन दो सालों में रात का औसत तापमान भी 17 और 18 डिग्री से ज्यादा रहा था। इन 12 सालों में नवंबर में रात का औसत तापमान भी 13 डिग्री से कम नहीं रहा। वेसे राजधानी में अभी तक 1977 में नवंबर सबसे गर्म रहा था।
Tuesday, November 6, 2018
जब पहली बार आमिर को आया था बिग बी का फोन, समझा था प्रैंक
बॉलीवुड के दो मेगास्टार अमिताभ बच्चन और आमिर खान पहली बार किसी मूवी में साथ नजर आने वाले हैं. दिवाली के मौके पर रिलीज हो रही मल्टीस्टारर फिल्म ठग्स ऑफ हिंदोस्तान में दोनों सिल्वर स्क्रीन पर साथ दिखेंगे. आमिर हमेशा से ही बिग बी के फैन रहे हैं. कॉफी विद करण-6 में एक्टर ने पहली बार महानायक अमिताभ संग फोन पर हुई बातचीत का जिक्र किया.
उन्होंने कहा, ''मैं बच्चन साहब का बड़ा फैन हूं. मुझे नहीं पता कि आज की जनरेशन मिस्टर बच्चन की फिल्म देखते वक्त कैसा महसूस करती है. मुझे आज भी याद है जब पहली बार मेरी उनसे बात हुई थी.''
आमिर ने कहा, ''उन दिनों मैं ऊंटी में 'जो जीता वही सिकंदर' की शूटिंग कर रहा था. तब कोई सेलफोन नहीं होते थे. मुझे रिसेप्शनिस्ट की तरफ से फोन आया कि मिस्टर बच्चन का फोन आया है. मुझे लगा ये मजाक है, कोई मेरे साथ मस्ती कर रहा है. आधे घंटे बाद, फोन की घंटी बजी और लाइन पर मिस्टर बच्चन थे. मैंने उत्साह या सरप्राइज होते हुए फोन हाथों से गिरा ही दिया था. उस बीतचीत में जो भी उन्होंने कहा मैंने जवाब में सिर्फ 'हां सर' कहा.''
बात मूवी की करें तो ठग्स में कटरीना कैफ और फातिमा सना शेख अहम किरदार में हैं. इसे विजय कृष्णा आचार्य ने डायरेक्ट किया है. ठग्स का एग्रेसिव तरीके से प्रमोशन नहीं किया जा रहा है. संभव है कि फिल्ममेकर्स की स्ट्रैटिजी के तहत ऐसा किया जा रहा है. आमिर खान हाल ही में अमिताभ बच्चन के 'शो कौन बनेगा करोड़पति' का हिस्सा बने थे.
बॉक्स ऑफिस पर 8 नवंबर को बड़े बैनर की ठग्स ही रिलीज हो रही है. फैंस को बेसब्री से मूवी की रिलीज का इंतजार है. देखना मजेदार होगा कि क्या आमिर की ठग्स उनकी पिछली फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ पाती है या नहीं.
कांग्रेस भले ही फंड की कमी से जूझ रही हो, लेकिन उसने अपने कर्मचारियों को दिवाली का 'तोहफा' देने में कोई कोताही नहीं की है. कांग्रेस ने अपने कर्मचारियों को दिवाली के मौके पर 55 दिन की तनख्वाह का 'बोनस' दिया है.
राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि चंदे में गिरावट की वजह से कर्मचारियों की दिवाली फीकी रह सकती है. पहले का इतिहास बताता है कि बंपर चुनावी जीत पर भी बोनस मिलता था, जो 2013 से पार्टी को मिली नहीं है.
सूत्रों का दावा है कि राहुल गांधी के सामने जब ये बात आई तो उन्होंने कर्मचारियों के बोनस में किसी तरह की कमी नहीं करने का निर्देश दिया. गौरतलब है कि इंदिरा गांधी के जमाने से ही पार्टी दफ्तर और अन्य जगहों पर काम करने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों को पार्टी की तरफ से दिवाली के मौके पर बोनस दिया जाता है.
बहरहाल पार्टी के खजाने की खस्ताहालत देखकर इस बार कुछ संशय था कि कर्मचारियों को बोनस मिल पाएगा या नहीं, लेकिन पार्टी ने अपनी परंपरा कायम रखी है. पार्टी को उम्मीद है कि इस कदम से 2019 के चुनाव से पहले उसके कर्मचारियों का उत्साह बढ़ेगा.
कांग्रेस के मीडिया विभाग में सचिव प्रणव झा ने बताया, 'इंदिरा गांधी के जमाने से यह प्रथा चलती आ रही है. दिवाली पर हम बोनस अपने कर्मचारियों को देते रहे हैं. राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद यह पहली दिवाली थी. यह बात सही है कि हमें हमारे पास फंड की कमी है और हम चुनाव लड़ने के लिए जनता से पैसा मांग रहे हैं. मगर राहुल गांधी ने कर्मचारियों के बच्चों के लिए उनके और उनकी दिवाली में रौनक हो इसके लिए फैसला लिया. इसलिए उनको बोनस देने का फैसला लिया गया है.'
उन्होंने कहा, ''मैं बच्चन साहब का बड़ा फैन हूं. मुझे नहीं पता कि आज की जनरेशन मिस्टर बच्चन की फिल्म देखते वक्त कैसा महसूस करती है. मुझे आज भी याद है जब पहली बार मेरी उनसे बात हुई थी.''
आमिर ने कहा, ''उन दिनों मैं ऊंटी में 'जो जीता वही सिकंदर' की शूटिंग कर रहा था. तब कोई सेलफोन नहीं होते थे. मुझे रिसेप्शनिस्ट की तरफ से फोन आया कि मिस्टर बच्चन का फोन आया है. मुझे लगा ये मजाक है, कोई मेरे साथ मस्ती कर रहा है. आधे घंटे बाद, फोन की घंटी बजी और लाइन पर मिस्टर बच्चन थे. मैंने उत्साह या सरप्राइज होते हुए फोन हाथों से गिरा ही दिया था. उस बीतचीत में जो भी उन्होंने कहा मैंने जवाब में सिर्फ 'हां सर' कहा.''
बात मूवी की करें तो ठग्स में कटरीना कैफ और फातिमा सना शेख अहम किरदार में हैं. इसे विजय कृष्णा आचार्य ने डायरेक्ट किया है. ठग्स का एग्रेसिव तरीके से प्रमोशन नहीं किया जा रहा है. संभव है कि फिल्ममेकर्स की स्ट्रैटिजी के तहत ऐसा किया जा रहा है. आमिर खान हाल ही में अमिताभ बच्चन के 'शो कौन बनेगा करोड़पति' का हिस्सा बने थे.
बॉक्स ऑफिस पर 8 नवंबर को बड़े बैनर की ठग्स ही रिलीज हो रही है. फैंस को बेसब्री से मूवी की रिलीज का इंतजार है. देखना मजेदार होगा कि क्या आमिर की ठग्स उनकी पिछली फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ पाती है या नहीं.
कांग्रेस भले ही फंड की कमी से जूझ रही हो, लेकिन उसने अपने कर्मचारियों को दिवाली का 'तोहफा' देने में कोई कोताही नहीं की है. कांग्रेस ने अपने कर्मचारियों को दिवाली के मौके पर 55 दिन की तनख्वाह का 'बोनस' दिया है.
राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि चंदे में गिरावट की वजह से कर्मचारियों की दिवाली फीकी रह सकती है. पहले का इतिहास बताता है कि बंपर चुनावी जीत पर भी बोनस मिलता था, जो 2013 से पार्टी को मिली नहीं है.
सूत्रों का दावा है कि राहुल गांधी के सामने जब ये बात आई तो उन्होंने कर्मचारियों के बोनस में किसी तरह की कमी नहीं करने का निर्देश दिया. गौरतलब है कि इंदिरा गांधी के जमाने से ही पार्टी दफ्तर और अन्य जगहों पर काम करने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों को पार्टी की तरफ से दिवाली के मौके पर बोनस दिया जाता है.
बहरहाल पार्टी के खजाने की खस्ताहालत देखकर इस बार कुछ संशय था कि कर्मचारियों को बोनस मिल पाएगा या नहीं, लेकिन पार्टी ने अपनी परंपरा कायम रखी है. पार्टी को उम्मीद है कि इस कदम से 2019 के चुनाव से पहले उसके कर्मचारियों का उत्साह बढ़ेगा.
कांग्रेस के मीडिया विभाग में सचिव प्रणव झा ने बताया, 'इंदिरा गांधी के जमाने से यह प्रथा चलती आ रही है. दिवाली पर हम बोनस अपने कर्मचारियों को देते रहे हैं. राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद यह पहली दिवाली थी. यह बात सही है कि हमें हमारे पास फंड की कमी है और हम चुनाव लड़ने के लिए जनता से पैसा मांग रहे हैं. मगर राहुल गांधी ने कर्मचारियों के बच्चों के लिए उनके और उनकी दिवाली में रौनक हो इसके लिए फैसला लिया. इसलिए उनको बोनस देने का फैसला लिया गया है.'
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